मुजरे के कारोबार पर भारी पड़ रही है नोटबंदी की मार

नई दिल्‍ली: मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद क्या किए गए मानों देश में हा हा कार मच गया। हर कोई खुल्ले पैसे निकलवाने के लाइनों की लंबी कतारों में नजर आने लगा। इस फैसले से छोटे-छोटे कारोबारी ही नहीं बल्कि दिल्ली की बदनाम गलियों में होने वाला मुजरे का कारोबार भी खासा प्रभावित हो रहा है। आलम यह है कि रोजाना होने वाले मुजरे की संख्या को भी ग्राहकों की कमी के कारण मजबूरन कम करना पड़ गया है।
इस पेशे से जुड़े संजीव बताते हैं कि दिल्ली के जीबी रोड़ पर उनके यहां रोजाना पांच से छह बार मुजरे के लिए महफिल सजती थी, परन्तु मौजूदा समय में स्थिति ऐसी हो गई है कि दो बार मुजरे के लिए ग्राहकों को इकट्ठा कर पाना भी मुश्किल हो गया है। मुजरे के एक दौर में नृत्यांगना करीब एक घंटे तक नाच गाना कर महमानों का मनोरंजन करती हैं। प्रत्येक दौर में करीब पांच हजार रुपये की कमाई हो जाती है, परन्तु मौजूदा समय में खुल्ले पैसों की ऐसी दिक्कत सामने आ रही है कि ग्राहकों ने आना ही बंद कर दिया है।

मुजरा कर ग्रहकों का मनोरंजन करती महिला
मुजरा कर ग्रहकों का मनोरंजन करती महिला

संजीव के मुताबिक मौजूदा समय को देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि आने वाले दिनों में यह समस्या जल्द खत्म होने वाली है। सरकार अपने निर्णय पर अड़ी हुई है। नाच गाने के काम को उनके ग्राहक मनोरंजन के तौर पर लेते हैं। जब उनके घर चूल्हा जलाने के लिए रुपयों का इंतजाम करने में ही भारी दिक्कत आ रही है तो वह मुजरे जैसे मनोरंजन के काम के लिए अपनी बची कुची उपलब्ध राशि को क्यों व्यर्थ करेंगे। सभी लोग लाइनों में हैं और हम केवल स्थिति का पहले जैसा होने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद करते हैं कि सरकार नियमों में कुछ राहत देगी जिस्से उनका व्यवसाय एक बार फिर चमकने लगेगा।

Leave a Comment