‘पैरों तले’ फिल्म के निर्माता को बेदखल पत्नी को देनी होगी घर में जगह

नई दिल्ली: वर्ष 2010 में आई फिल्म पैरों तले के निर्माता सिद्धार्थ श्रीनिवासन को अपनी पत्नी को घर में जगह देनी ही होगी। पटियाला हाउस कोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले में उनकी पत्नी को बड़ी राहत देते हुए यह अंतरिम फैसला सुनाया है। पत्नी दिव्या ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को सत्र अदालत में चुनौती दी थी।
पत्नी का कहना था कि फिल्म के निर्माण के दौरान उसने कर्जा लेकर पति को रुपये दिए थे। कर्जा वह अब तक अपनी तनख्वाह से चुका रही हैं। फिल्म ने अच्छी कमाई की। इसके बावजूद पति ने उसे रुपये नहीं लौटाए। फरवरी 2014 में जब फिल्म दूरदर्शन पर आई तो उसने पति से 25 लाख रुपये वापस पाने के लिए अगल से पति के खिलाफ दीवानी मुकदमा दाखिल किया था। हाल ही में उसकी नौकरी भी छूट गई है, जिससे उसकी समस्याएं और बढ़ गई हैं।
विशेष सीबीआइ जज विनाद कुमार ने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत का कहना है कि महिला एनडीटीवी जैसे बड़े मीडिया संस्‍थान में काम करती है। उसकी  तनख्वाह को 68 हजार रुपये पति माह पाते हुए अदालत ने अंतरिम गुजारा भत्ता देने से इंकार कर दिया था। मौजूदा स्थिति में पीडि़ता बेरोजगार है। ऐसे में अदालत ने उसे गुजारा भत्ता प्राप्त करने के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष फिर से याचिका लगाने की सलाह दी।
मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि पति पहले ही दिव्या से तलाक पाने की इच्छा जाहिर कर चुका हैं। ऐसे में अगर महिला को दोबारा पति के घर रहने की इजाजत दी गई तो इससे दोनों की जिंदगी नर्क बन जाएगी। सत्र न्यायाधीश ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि घरेलू हिंसा कानून के तहत महिला को रहने के लिए घर मिलने का अधिकार है। उसके पिता की मौत हो चुकी है। फिलहाल वह अपने भाई की दया पर उसके घर में रहने को मजबूर है। ऐसे में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उसके पति के घर में महिला को रहने की इजाजत दी जाती है। महिला की सुरक्षा को लेकर निचली अदालत उसके लिए प्रोटेक्शन ऑफिसर की नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है।
जिस घर में दिव्या को रहने की इजाजत दी गई है उसपर पहले ही उसकी सास व उनके भाई के परिवार के बीच विवाद चल रहा है। अदालत ने कहा कि उक्त सिविल मुकदमे का फैसला अगर उसकी सास के विरुद्ध आता है तो पीडि़ता को घर छोडऩा ही होगा। पीडि़ता उस मामले में पक्ष नहीं है। ऐसी स्थिति में उसका अधिकार उसके ससुराल वालों के अधिकार पर अधीन है।

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