मोदी सरकार ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को थमा दिया विवादित बंगला!

नई दिल्ली:  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों राजधानी में स्थित उनके सरकारी आवास से केन्द्र द्वारा बेदखल किए जाने से बिफ्रे हुए हैं। दरअसल, लुटियन जोन में स्थित जिस बंगले में वह वर्ष 2009 से रह रहे हैं उससे उन्हें बेदखली का आदेश दे दिया गया है। उन्हें जो नया बंगला आवंटित किया गया है वह पहले ही किसी अन्य परियोजना के चलते विवादों में है।

हरीश रावत ने केन्द्र सरकार के इस कदम पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष जिला अदालत में केन्द्र के आदेश को चुनौती दी है। फिलहाल केन्द्र सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। मामले की अगली सुनवाई अब 29 नवंबर को होगी।

हरीश रावत का कहना है कि केन्द्रीय मंत्री होने के कारण वर्ष 2009 में उन्हें तीन मूर्ति लेन में टाइप-7 श्रेणी का बंगला नंबर-9 आवंटित किया गया था, लेकिन 2014 में वह उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बन गए थे। जिसके चलते उन्हें बंगला खाली करने का फरमान सुनाया गया था। रावत ने केन्द्र सरकार से अपील की थी कि एक हादसे में उनकी गर्दन में गंभीर चोटें आई हैं। वह बीमारी का इलाज एम्स अस्पताल में करा रहे हैं। जिसे देखते हुए उन्हें इसी बंगले में रहने की इजाजत दे दी जाए। इस बंगले को राज्य सरकार के कोटे के तहत उन्हें दे दिया जाए। वर्ष 2014 और 2015 में मुख्यमंत्री की दरख्वास्त पर वार्षिक तौर पर बंगला आवंटित कर दिया गया था। वर्ष 2016 में उनकी विस्तार संबंधित मांग को ठुकरा दिया गया। साथ ही उन्हें घर से बेदखली के आदेश पारित कर यह बंगला केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर को दे दिया गया।

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अदालत में हरीश रावत की तरफ से कहा गया कि उन्हें राउस एवेन्यू में टाइप-6 श्रेणी का नया बंगला आवंटित किया गया। पर बाद में केन्‍द्र सरकार ने उन्हें स्‍वयं बताया गया कि यह बंगला तो रहने लायक है ही नहीं। इसे रहने लायक बनाने में काफी समय लगेगा।

बाद में उन्हें पुराना किला रोड पर बंगला नंबर एबी-01 आवंटित कर दिया गया। हरिश रावत का कहना है कि यह बंगला पहले ही किसी परियोजना के तहत विवादित है। जिसका कुछ समय बाद अधिग्रहण कर लिया जाएगा। यहां सवाल यह उठता है कि जब बंगला कुछ समय बाद फिर अधिग्रहण ही किया जाना है तो फिर यह बचा कुचा बंगला उन्हें क्यों दिया जा रहा है।

वहीं, केन्द्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि उनके पास टाइप-7 श्रेणी में कोई अन्य बंगला फिलहाल उपलब्ध ही नहीं है। उनका पुराना बंगला अब केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर को दिया जा चुका है, ऐसे में अब उन्हें नए बंगले में शिफ्ट होना ही होगा। हरिश रावत की तरफ से अदालत में कहा गया कि केन्द्र उन्हें बताए कि नया बंगला उन्हें किसी श्रेणी में दिया जा रहा है। बंगला राज्य सरकार के कोटे के तहत है या फिर बतौर मुख्यमंत्री उनके कार्यकाल के लिए यह बंगला दिया जा रहा है।
—–संदीप——–

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