आखिर, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में क्‍यों बिगड़े हालात…

लापता छात्र नजीब के बारे में पता लगाने के लिए प्रदर्शन करते छात्र नेता
फोटो- लापता छात्र नजीब का पता लगाने की मांग को लेकर के लिए प्रदर्शन करते छात्र

नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ( जेएनयू ) में बिगड़ते हालातों का मुद्दा गृह मंत्रालय की दहलीज तक भी पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से फोन पर बातचीत कर हालातों पर चर्चा की।

एमएससी बायो टेक्नोलॉजी के छात्र के संदिग्ध परिस्थितियों में बीते छह दिनों से लापता होने के बाद से ही छात्रों ने युनिवर्सिटी प्रशासन को बंधक बनाया हुआ है। जेएनयू के कुलपति सहित 11 अन्य सदस्य एडमिन ब्लॉक में कैद हैं। उधर, छात्र नेताओं ने बंधक बनाने के आरोपों से इंकार किया है।

नजीब का कुछ अन्य सहपाठियों से झगड़ा होने का आरोप

यह मामला उस वक्त सामने आया जब 15 अक्टूबर को छात्र नजीब और कुछ अन्य सहपाठियों के बीच झगड़ा हो गया। आरोपों के मुताबिक एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने बाहरी युवकों की मदद से कैंपस के अंदर नजीब के साथ मारपीट की। जिसके बाद से ही नजीब के बारे में किसी को काई जानकारी नहीं मिल सकी। सत्ता धारी छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को हल्के में लिया जिसके चलते नजीब के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। स्वयं कुलपति ने भी इस बात की पुष्टि की है कि छात्रों ने उन्हें विश्वविद्यालय के एडमिन ब्लॉक में बंधक बनाया हुआ है। वे उन्हें बाहर नहीं आने दे रहे हैं।
जेएनयू के एक बार फिर गलत वजहों से चर्चा में आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक दिन पहले ही दिल्ली पुलिस आयुक्त आलोक वर्मा से इस बाबत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन हालात काबू से बाहर जाता देख गृह मंत्री गुरुवार को स्वयं एक्टिव हो गए। उन्होंने आलोक वर्मा से बातचीत कर जल्द से जल्द लापता छात्र का पता लगाने के निर्देश दिए। दिल्ली पुलिस पहले ही परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर चुकी है। नजीब के बारे में जानकारी देने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने की भी घोषणा की गई थी।

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