अदालत ने पूछा, सरकार हृदय व धमनियों के इलाज में जरूरी स्टेंट की कीमत क्यों नहीं करती ?

नई दिल्ली: हृदय व धमनियों के संकुचित होने की बीमारी से पीडि़त मरीजों को राहत देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्टेंट को राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (एनइएलएम) में शामिल करने के बावजूद इसकी कीमत कम नहीं होने के खिलाफ लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने केन्द्र सरकार से पूछा कि स्टेंट की कीमत को तय करने को लेकर आपका क्या पक्ष है। इस संदर्भ में 22 दिसंबर तक आप अपना जवाब अदालत में दाखिल करें।
पेश मामले में याची बिरेंद्र सागवान ने कहा था कि 19 जुलाई 2016 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें स्टेंट को राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची में शामिल करने की बात कही गई है। इससे स्टेंट एक तय कीमत पर ही उपलब्ध होगा और स्टेंट की कीमत सस्ती हो जाएगी। आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करने के फैसले के करीब चार महीने के बाद भी स्टेंट की कीमत निर्धारित नहीं की गई है। इसके चलते उसे आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करने का फायदा मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
उसका कहना था कि केन्द्र सरकार और राष्ट्रीय दवा कीमत प्राधिकरण (एनपीपीए) इस बेहद जरूरी काम को पूरा करने में लापरवाह हैं। हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज व हार्ट अटैक होने पर स्टेंट डालकर एंजियोप्लास्टी की जाती है। देश में हर आर्थिक वर्ग के लोग हृदय संबंधित बीमारी से ग्रस्त हैं। उनके इलाज के लिए स्टेंट की जरूरत पड़ती है, लेकिन इसकी कीमत अधिक होने के चलते हर कोई इसका खर्च वहन कर पाने में सक्षम नहीं हैं।

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