मानसिक रोगियों के लिए बने अनाथालयों के संचालन से केन्द्र और दिल्ली सरकार ने झाड़ा पल्ला

नई दिल्ली:  दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद राजधानी में बेसहारा मानसिक रोगियों के लिए पांच अनाथालय बनाए। अनाथालय करीब साल भर से बनकर तो तैयार हो गए लेकिन इनके संचालन की जिम्मेदारी उठाने को लेकर केन्द्र और दिल्ली सरकार एक बार फिर आपस में भिड़ गए। आलम यह है कि मरीज इलाज की बाट जो रहे हैं और सरकार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़कर बचने में लगी है। सरकारी उदासीनता के कारण अनालालय शुरु नहीं कर पाने से नाराज तीस हजारी अदालत ने केन्द्र और दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि सरकारी तंत्र इन्हें शुरू करने को लेकर जरा भी चिंतित नहीं है।
महानगर दंडाधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है। दिल्ली सरकार बताए कि आखिर क्यों वे दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की अनुपालना करते हुए समयबद्ध तरीके से मानसिक रोगियों के लिए बने अनाथालयों को चालू करने में असमर्थ हैं।

अदालत के समक्ष यह याचिका निर्मल छाया द्वारा लगाई गई थी। याचिका में कहा गया था कि उनके पास मौजूद एक मानसिकरोगी महिला को इस तरह के मरीजों के लिए बने उचित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। हाई कोर्ट ने वर्ष 2009 में एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिल्ली सरकार को मानसिक रोगी च्च्चों के लिए अनाथालय बनाने के निर्देश दिए थे।
मजिस्ट्रेट अदालत ने कहा अनाथालयों का संचालन नहीं हो पाने के कारण अनाथ मानसिक रोगी ऐसी जगह रहने के लिए मजबूर हैं जहा उनका ठीक से इलाज भी नहीं हो पा रहा है। स्वयं सेवी संस्था भी इस महिला का सहारा देने को तैयार नहीं है। उपर से केन्द्र और दिल्ली सरकार भी अपने हाथ बंधे होने की बात कह चुकी हैं। अगर देश की राजधानी में मानसिक रोगियों की यह स्थिति है तो इस बात की जांच होनी चाहिए कि पूरे देश में इनका क्या हाल होता होगा।
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 के अंतर्गत मानसिक रोगियों के अधिकारों व उनके मानवाधिकारों पर सहायता के लिए अदालत ने राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी कर उन्हें 26 दिसंबर को अगली तारीख पर पेश होने का हुक्म दिया है। अदालत ने कहा कि पीडि़त महिला के सही इलाज व उसके अधिकारों की रक्षा के लिए उक्त संस्थानों से सहायता लेना बेहद जरूरी है।
इसी बीच दिल्ली सरकार द्वारा बताया गया कि उन्होंने रोहिणी स्थित अनाथालय के संचालन की जिम्मेदारी इहबास को सौंप दी है। इसपर अदालत ने इहबास से अपनी तरफ से इसकी जानकारी अदालत को सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

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