कैदी ने पुराने नोट बदलने के लिए बैंक जाने के लिए मांगी पैरोल

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट में एक शख्स ने याचिका लगाकर कहा कि नोटबंदी के फैसले के बाद कैदियों के पास मौजूद 500 व एक हजार के नोट उन्हें बदलवाने का मौका मिलना चाहिए। सभी विचाराधीन और दोषी ठहराए जा चुके कैदियों को एक-एक कर पैरोल प्रदान की जाए। हालांकि इस याचिका पर हाई कोर्ट ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
इससे पूर्व याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए केन्द्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा था कि जेल मैन्यूअल के मुताबिक जब कोई अपराधी पकड़ा जाता है तो उसके पास से बरामद हुए समान को एक बैंक में डाल दिया जाता है। सजा काटकर छूटने के बाद इस रकम को उसे लौटा दिया जाता है। कैदी जब भी जेल से छूट कर आएंगे उनके पास से बरामद हुई नकदी को नई करेंसी में लौटाया जाएगा। ऐसे में याचिका को काई मतलब नहीं बनता है।
घर में मौजूद कैश के मसले पर केन्द्र सरकार की तरफ से कहा गया कि कैदियों के परिजन इस काम को बैंक की लाइन में लग कर कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें केवासी (नो योर कस्टमर) फार्म कैदियों के परिजनों को भरने की जरूरत भी नहीं हैं। बैंक में जाकर आसानी से पुराने नोट बदलवाए जा सकते हैं।
याचिका लगाने वाले वकील शाश्वत भारद्वाज ने कहा कि सभी कैदियों को एक-एक कर पैरोल प्रदान की जानी चाहिए। ताकि वह बाहर आकर उनके घरों में मौजूद 500 व एक हजार के नोट को बदलवा सकें। कहा गया कि जेल प्रशासन को आरबीआइ से मदद लेकर सभी कैदियों के नोट बदलने के लिए विशेष इंतजाम करने चाहिएं।

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