डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी ने पाकिस्तानी जासूस को शिकंजे से बचाया

 

 

डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी प्राप्‍त पाकिस्‍तानी उच्‍चायोग में तैनात जासूस मोहम्‍मद अख्‍तर
डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी प्राप्‍त पाकिस्‍तानी उच्‍चायोग में तैनात जासूस मोहम्‍मद अख्‍तर

 

नई दिल्‍ली: जासूसी करते पकड़े गए पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात अधिकारी मोहम्मद अख्तर को डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी ने बचा लिया। राजनायकों को मिलने वाली विशेष छूट का उसे सीधा फायदा मिला जिसके चलते भारत की खुफिया जानकारी से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद भी उसे छोडऩा पड़ा।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा पाकिस्तानी राजनायक मोहम्मद अख्तर के पकड़े जाने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान उच्चायोग को यह आदेश दिया है कि वह तुरंत उक्त अफसर को भारत से जाने का निर्देश दें।

      क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त रवीन्द्र यादव ने पूरे घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी टीम बीते डेढ़ साल से आर्मी व बीएसएफ की खुफिया सूचना लीक करने वाले नेटवर्क पर काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में बीते छह माह से हलचल तेज होने लगे। विश्वसनीय सूचना के आधार पर बुधवार सुबह नई दिल्ली में स्थिति चिडिय़ाघर के पास जाल बिछाया गया। पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात अधिकारी मोहम्मद अख्तर ने यहां अपने दो जासूसों को दस्तावेज सौंपने के लिए बुलाया हुआ था। तुरंत तीनों को दस्तावेजों के साथ धर दबोचा गया।
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच के दौरान मोहम्मद अख्तर खुद को दिल्ली का ही बाशिंदा बताकर जांच की दिशा को भटकाने का प्रयास करने लगा। उसने चांदनी चौक का स्थाई निवासी होने के संबंध में आधार कार्ड व अन्य सुबूत भी प्रस्तुत किए। लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने बाद में सब कुछ सच सच बता दिया।
रवीन्द्र यादव ने बताया कि आधिकारिक तौर  पर मोहम्मद अख्तर की गिरफ्तारी डालते वक्त उसने कहा कि वह उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकते हैं क्योंकि वह पाकिस्तानी राजनायक है। डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी के तहत उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। जिसके बाद तुरंत विदेश मंत्रालय को इसकी सूचना दी गई। विदेश मंत्रालय के अधिकारी पाकिस्तान उच्चायोग के अफसरों के साथ क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे। जहां उन्होंने मोहम्मद अख्तर की पहचान कर ली।

कौन है मोहम्मद अख्तर?
क्राइम ब्रांच के मुताबिक मोहम्मद अख्तर पहले पाकिस्तान सेना में काम कर चुका है। वह पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आइएसआइ को एक दम खास है जिसके चलते उसे विशेष मिशन पर भारत भेजा गया। भारत में पाकिस्तान उच्चायोग में उसकी ड्यूटी वीजा विभाग में लगाई गई ताकि वह ज्यादा से ज्यादा भारत के आम लोगों के संपर्क में आ सके।
रवीन्द्र यादव ने बताया कि वह ऐसे करीब लोगों की तलाश करता था जो आसानी से चंद रुपयों के लिए आइएसआई के लिए काम करने को राजी हो जाते। गिरफ्तार सह आरोपी मौलाना रमजान और सुभाष जहांगीर भारत के ही निवासी हैं।

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