बच्चों में पोषण की कमी की अंतरराष्ट्रीय मानकों पर जांच करा रहा UNICEF

-हिन्दी न्यूज लेटेस्ट की टीम को यूनिसेफ ने जयपुर के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक गांव में फिल्ड विजिट करवा  दिखाई पूरे प्रोजेक्ट की झलक

नई दिल्ली: यू तो बच्चों को देश का भविष्य मानते हुए उनके विकास को लेकर सरकारी तंत्र द्वारा ढेरों कार्यक्रम शुरू करने के दावे किए गए हैं। स्कूली शिक्षा से लेकर बच्चों के स्वास्थ्य के संबंध में पोलिया टीकाकरण व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में बच्चों को मिल रहे पोषण के स्तर को मापने को लेकर आजतक सरकारी स्तर पर कोई सर्वे किया ही नहीं गया है। मसलन सरकार को पता ही नहीं है कि गांव देहात में बच्चे किस तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को अंतराष्ट्रीय मानकों पर मापने के लिए यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रन फंड (UNICEF) ने एक बड़ी पहल की है। देश के सभी 30 राज्यों में करीब एक लाख 20 हजार बच्चों को मिल रहे पोषण की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों पर की जाएगी।

UNICEF के भारतीय कार्यालय की उपप्रतिनिधि हेनरिट एहरन्स ने एक और दो दिसंबर को जयपुर से करीब 50 मिलोमीटर दूर एक गांव में फील्‍ड विजिट के दौरान बताया कि केन्द्र स्वास्थ्य मंत्रालय व अन्य सभी भारतीय स्टेंटर्ड से अनुमति लेने के बाद यह सर्वे कराया जा रहा है। हालांकि इस सर्वेक्षण में भारत सरकार की तरफ से उन्हें किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है। भारतीय मूल के उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल के बच्चे आदित्य और मेघा मित्तल इस पूरे सर्वेक्षण के लिए 10 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया है।
हेनरिट ने बताया कि इसी वर्ष मार्च माह से इस सर्वेक्षण की शुरूआत हो चुकी है। UNICEF का यह सर्वेक्षण दिसंबर 2017 तक चलेगा। इस दौरान देश के सभी 30 राज्यों को कुल एक लाख 20 हजार बच्चों को मिलने वाले पोषण की जांच की जाएगी। 30 में से 12 राज्‍यों का सर्वेक्षण हो चुका है। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बच्चों को शामिल किया गया है। बच्चों को 0-4 वर्ष, 5-14 वर्ष और 15-19 वर्ष में बांटा गया है।

UNICEF ने बताया कि वर्ष 2018 में उन्‍हें सर्वेक्षण के नतीजे मिल जाएंगे। यह नतीजे वह सरकार को देंगे। ताकि बच्‍चों के लिए पॉलिसी बनाने में सरकार को मदद मिल सके।

कई स्तरों पर होगी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच
1.

बच्चों के खून के नमूने लेकर उसमें मौजूद पोषण की मात्रा का पता लगाने के लिए एसआरएल लैब में होगा टेस्ट।
बच्चों के खून के नमूने लेकर उसमें मौजूद पोषण की मात्रा का पता लगाने के लिए एसआरएल लैब में होगा टेस्ट।

2.

 ब्लड प्रैशर की भी होगी जांच।
ब्लड प्रैशर की भी होगी जांच।

3. वजन की जांच कर पोषण की कमी का पता लगाने के लिए होगी जांच।
4. लंबाई के अनुपात में वजन की होगी जांच
5.

सर्वेक्षण में बच्चों के कमर को मापना भी शामिल।
सर्वेक्षण में बच्चों के कमर को मापना भी शामिल।

6.

शारीरिक क्षमता का पता लगाने के लिए कलाई की शक्ति की भी होगी जांच।
शारीरिक क्षमता का पता लगाने के लिए कलाई की शक्ति की भी होगी जांच।

7. कमर पर मौजूद बच्चे की खाल की मोटाई से पोषण की होगी जांच।
8.
9. सभी सवालों के जवाब कंप्यूटर में अंकित किए जाएंगे।

जांच दल को दिया गया अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रशिक्षण

UNICEF के मुताबिक बच्चों को मिलने वाले पोषण से लेकर उनके सामाजिक व आर्थिक स्थिति की जांच करने वाली टीम को भारतीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ट्रेनिंग दी गई है। बच्चों के बीच सर्वेक्षण करने वाले प्रत्येक महिला एवं पुरुष को यूनिसेफ ने स्वयं 25 दिनों तक विभिन्न मानकों पर प्रशिक्षण दिया है।

लोगों के कड़े व्यवहार से भी परेशान हुए सर्वेक्षक

देश में 30 राज्यों में से 12 राज्यों में अबतक सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण टीम का संचान करने वाली एसआरएल लैब की डॉक्टर दीप्ती ने बताया कि बिहार और नागालैंड जैसे राज्यों में सर्वेक्षण के दौरान गांव में कुछ लोग इस कदर उग्र हो गए कि उन्होंने सर्वेक्षण टीम के कर्मचारियों को ही बंधक बना लिया। कई बार तो टीमों को दोबारा मोहल्ले में नजर नहीं आने की भी हिदायत दी गई।

 

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