कहीं आपके घर में पक रही दाल में मलमूत्र तो नहीं ?

अरहर की दाल
अरहर की दाल

नई दिल्‍ली: आपके घर में पक रही दाल में कहीं मलमूत्र तो नहीं हैं। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दिनों बाजार में उपलब्ध दाल में मलमूत्र मिलाकर बेचा जा रहा है। दिल्ली सरकार के खाद्य विभाग द्वारा बाजार से लिए गए सैंपल की लैब टेस्टिंग में इस बात की पुष्टि हुई।

पटियाला हाउस कोर्ट की सत्र अदालत ने अरहर की दाल में मलमूत्र व रंग मिलाकर बेचने वाले एक दुकानदार को इस अपराध के लिए सारा दिन अदालत परिसर में खड़ा रहने की सजा सुनाई है। हालांकि दुख की बात यह है कि इस अनैतिक काम को करने वाले व्यक्ति को इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने डेढ़ साल कैद की सजा सुनाई थी। वैसे तो लोगों के खाद्य उत्पाद में मलमूत्र मिलाकर बेचने वाले इस शख्स को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए थी, लेकिन कानून में संशोधन होने के बाद यह संभव नहीं हो सका। विवश होकर अदालत ने सजा की अवधि को घटाया।
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि कीर्ति नगर स्थित दोषी की दुकान से लिए गए अरहर की दाल के सेंपल में से टरटेजाइन नामक कैमिकल बरामद हुआ। यह एक सिंथेटिक रंग है जिसके प्रयोग से दाल पर रंग किया जाता है। वहीं लैब टेस्टिंग के दौरान सैंपल में दो पीस मलमूत्र के भी मिले। ऐसे में दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
जज राकेश पंडित ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ फूड एडल्ट्रेशन एक्ट, 1954 की धारा 16(1-ए)(2) के तहत आरोप तय नहीं किए गए थे। जिससे यह पता चलता है कि उक्त मिलावटी सामान सेहत के लिए हानिकारक नहीं था।
वर्ष 2006 में आए नए फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट के तहत सुनवाई की याचिका को अदालत ने स्वीकार किया। नए कानून के तहत छह माह सजा व एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। केवल सारा दिन मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष खड़ा रहने की सजा दोषी को सुनाई गई। इसके अलावा उसपर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
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