अपराधी पर जज को आया रहम, सजा की कम

जज ने अपराधी के साथ बरती नरमी
जज ने अपराधी के साथ बरती नरमी

 

नई दिल्ली: कोई भी बदमाश यूं तो जल्द रूपए कमाने के लालच में अपराध की दुनिया में बेबी स्‍टेप रखता है, लेकिन जब तक उसे अपनी गलती का अहसास होता है बहुत देर हो चुकी होती है। ऐसे में अब उसके पास वापसी का कोई रास्ता नहीं होता। तीस हजारी के जज ने पुलिस द्वारा दिल्ली से तडि़पार करने के बावजूद शहर में डेरा जमाने वाले एक ऐसे ही कुख्यात अपराधी पर पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए नरमी बरती है।

विशेष जज विनय कुमार खन्ना ने माना कि अरुण उर्फ नोट्टी पर लगे आरोपी साबित हुए हैं। उसे पता था कि दिल्ली पुलिस ने उसे तडि़पार किया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद भी कानून का उल्लंघन करते हुए उसने दिल्ली में डेरा जमाए रखा। मजिस्ट्रेट आदलत ने इस जुर्म के लिए उसे दो साल कैद की सजा सुनाई थी। जिसे दोषी ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी।

सत्र न्यायाधीश ( जज )  ने कहा कि वह निचली अदालत के जज के समक्ष चले ट्रायल के दौरान पहले ही 11 माह से अधिक समय दोषी जेलम में बिता चुका है। पारिवारिक स्थिति को देखते हुए उसे अब तक जेल में बिताई गई सजा के आधार पर मुक्त करना ही उचित होगा।

दोषी ने अपनी याचिका में उपरी अदालत के जज के समक्ष कहा था कि उसकी उम्र महज 30 साल है। परिवार में वृद्ध माता पिता के अलावा बीमार पत्नी और चार छोटे बच्चे हैं। तीन बच्चे स्कूल जाते हैं जबकि सबसे छोटा बच्चा अभी स्कूल लायक भी नहीं हुआ है। ऐसे में उसे जेल में रखा गया तो परिजनों के लिए घर चलाने का भी संकट पैदा हो जाएगा।

उधर, दिल्ली पुलिस की तरफ से जज के समक्ष कहा गया था कि दोषी पर वर्ष 2001 से 11 के दौरान अनेकों अपराधिक मामले मध्य दिल्ली के पुलिस स्टेशनों में दर्ज हैं। उसके अपराधिक चरित्र और लोगों में उसकी बढ़ती दहशत को देखते हुए मध्य दिल्ली के एडिशनल डीसीपी ने वर्ष 2012 में उसे तडि़पार करने का आदेश जारी किया था। लेकिन स्थानीय लोगों में अपनी दहशत कायम रखने के लिए वह गुपचुप तरीके से इलाके में ही डेरा जमाए हुए था।

जज साहब ने पुलिस और दोषी की बात गौर से सुनीत। जिसके बाद दोषी की पारिवारिक स्थिति को देखते हुए माना कि दोषी को सुधरने का मौका मिलना चाहिए।

 

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